हद में रहें दलाई लामा
हद में रहें दलाई लामा
बोले बर्धन साब सुनामा
उनको बीजिंग ललित-ललामा ।
ल्हासा से उनको क्या कामा ॥
पंचशील का चीर उतारा
पीठ हमारे खंजर मारा
उससे क्या होता जाता है?
राग पुराने क्यूं गाता है ?
ऊंचे सुर में करता बाता
सीमा पर करता उत्पाता
हाथ बढाएं,दिखाता लाता
मनमोहन हैं दीन सुदामा
जियाबाओ पहलवान हैं गामा
हद में रहें दलाई लामा ।
बोले बर्धन साब सुनामा ॥
उदयप्रकाशी तिब्बत ! तिब्बत !
हम जाने हैं धांसू हिकमत
हम तो नहिं मर्जी के सूरा
पार्टी के बंधुआ मजदूरा
सच की आंख उड़ावें धूरा
कहते हैं आधे को पूरा
गर जो करेंगे चौड़ा सीना ।
लामा भी होंगे नसरीना ॥
तुम मिट्टी को मां को मानो
हमरे बल को कम मत जानो
नहिं बूझोगे ? नहिं मानोगे ?
अपनी-अपनी तुम हांकोगे
हम ठोकेंगे हम पीटेंगे
हम फ़्राडेंगे हम चीटेंगे
हमको करने दो मनमाना।
देखो हमरा नन्दीग्रामा ॥
टुंड दिखा कर भीख मांगते
बिन मांगे ही सीख बांटते
बच्चा होय चीन में पैदा
बांट गुलगुले हम हों शैदा
लगे हॉर्लिक्स उनका मैदा
जम्बूद्वीपी चिरकुट लोगा
चीनी माल करो उपभोगा
चीन किसी से नहीं डरेगा
और पनारा यहीं गिरेगा
हमरा अल्पसंख्यक हमरा वोटा
उनका अल्पसंख्यक खावे चोटा
तिब्बत-दमन चीन का मसला
तू क्यों फिरे उठाए तसला
हमरा है क्या आता-जाता
काहे मूरख होत उदासा
हम तो हैं पार्टी करि दासा
चीन हमारा पावन धामा
हमको है लोचन अभिरामा
हद में रहें दलाई लामा ।
बोले बर्धन साब सुनामा ॥
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April 9, 2008 at 10:13 am
बहुत सशक्त।
ये बर्धन साब जो हैं न सुनामा; कुछ ही महीनों में बोलती बन्द होगी इनकी। फेचकुर निकला करेगा मुंह से। बहुत चढ्ढी गांठ लिये सरकार पर 4-5 साल की। अभी भी टाइम है अपने पावन धाम को चले जायें।
April 9, 2008 at 12:29 pm
बहुत खूब ..मन की बात कह दी आपने..!
April 9, 2008 at 1:32 pm
बहुत बढ़िया भाई जी धन्यवाद
April 9, 2008 at 2:07 pm
वाह!
April 9, 2008 at 2:50 pm
सशक्त प्रहार. एकदम निशाने पर. शानदार.
April 9, 2008 at 3:09 pm
बड़े दिनों बाद कलम चलाई और क्या खूब चलाई..
April 10, 2008 at 6:28 am
सही है, स्वामीजी.. ओहोहो..
April 10, 2008 at 6:31 am
सही है, स्वामीजी, क्या बात है, ओहोहो..
April 10, 2008 at 9:00 am
वाह जी वाह ..क्या सरकार ने इस तरह की कविताओ पर अभि तक रोक नही लगाई है क्या..?
April 10, 2008 at 9:07 am
दलाई लामा का चुनाव हो , यह बर्धन भी नहीं कहता ।