हद में रहें दलाई लामा
April 9, 2008
हद में रहें दलाई लामा
बोले बर्धन साब सुनामा
उनको बीजिंग ललित-ललामा ।
ल्हासा से उनको क्या कामा ॥
पंचशील का चीर उतारा
पीठ हमारे खंजर मारा
उससे क्या होता जाता है?
राग पुराने क्यूं गाता है ?
ऊंचे सुर में करता बाता
सीमा पर करता उत्पाता
हाथ बढाएं,दिखाता लाता
मनमोहन हैं दीन सुदामा
जियाबाओ पहलवान हैं गामा
हद में रहें दलाई लामा ।
बोले बर्धन साब सुनामा ॥
उदयप्रकाशी तिब्बत ! तिब्बत !
हम जाने हैं धांसू हिकमत
हम तो नहिं मर्जी के सूरा
पार्टी के बंधुआ मजदूरा
सच की आंख उड़ावें धूरा
कहते हैं आधे को पूरा
गर जो करेंगे चौड़ा सीना ।
लामा भी होंगे नसरीना ॥
तुम मिट्टी को मां को मानो
हमरे बल को कम मत जानो
नहिं बूझोगे ? नहिं मानोगे ?
अपनी-अपनी तुम हांकोगे
हम ठोकेंगे हम पीटेंगे
हम फ़्राडेंगे हम चीटेंगे
हमको करने दो मनमाना।
देखो हमरा नन्दीग्रामा ॥
टुंड दिखा कर भीख मांगते
बिन मांगे ही सीख बांटते
बच्चा होय चीन में पैदा
बांट गुलगुले हम हों शैदा
लगे हॉर्लिक्स उनका मैदा
जम्बूद्वीपी चिरकुट लोगा
चीनी माल करो उपभोगा
चीन किसी से नहीं डरेगा
और पनारा यहीं गिरेगा
हमरा अल्पसंख्यक हमरा वोटा
उनका अल्पसंख्यक खावे चोटा
तिब्बत-दमन चीन का मसला
तू क्यों फिरे उठाए तसला
हमरा है क्या आता-जाता
काहे मूरख होत उदासा
हम तो हैं पार्टी करि दासा
चीन हमारा पावन धामा
हमको है लोचन अभिरामा
हद में रहें दलाई लामा ।
बोले बर्धन साब सुनामा ॥
******