संकर भाषा के जन्म पर सोहर उर्फ़ डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - १

संकर भाषा के जन्म पर सोहर 

उर्फ़ 

डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - १

 

पमन्यु चटर्जी के अंग्रेज़ी उपन्यास इंग्लिश ऑगस्ट का नायक अगस्त्य सेन समकालीन भारत की ऐसी युवा पीढी का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी अंग्रेज़ी शिक्षा ने उसे अपने समाज और जीवन से काट कर अपने ही देश में अजनबी बना दिया है . अब कम-से-कम भाषा के स्तर पर यह दूरी पाटने की एक जोरदार मुहिम चल निकली है . हिंदी में अंग्रेज़ी की अनपेक्षित और अवांछनीय घालमेल से एक नए किस्म की संकर भाषा के जन्म पर विद्वज्जन बलिहारी हो रहे हैं . और ऐसा करते समय वे भाषाओं के मध्य अंतर्क्रिया,उदार ग्रहणशीलता, अनुकूलन और समंजन जैसे पदबंधों और संप्रत्ययों का भी बेहद होशियारी से हवाला देते चलते हैं .

हिंदी बोलते समय अंग्रेज़ी शब्दों का इस्तेमाल कोई नई घटना नहीं है . इसकी पृष्ठभूमि में है हमारा औपनिवेशिक अतीत . निस्संदेह यह हमारी मौखिक अभिव्यक्ति का हिस्सा रहा है . परंतु अब जब सांस्कृतिक प्रभुत्ववाद के भूमंडलीय अभियान के तहत इसे बाकायदा एक भाषा का दर्जा देकर महिमामंडित किया जा रहा हो और इसे नए युग की भाषा के रूप में प्रचारित किया जा रहा हो तो न केवल इस भाषा के स्वरूप-संरचना और प्रभाव पर  विचार करना ज़रूरी हो गया है वरन समूचे सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक  है .

                                                                             

                                                                                     क्रमशः ……. 

13 Responses to “संकर भाषा के जन्म पर सोहर उर्फ़ डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - १”

  1. ज्ञानदत पाण्डेय Says:

    हमें तो नहीं लपेट रहे? :) अब तो हमारे अंग्रेजी के शब्द भी कुछ कम हो गये हैं!

  2. रवि Says:

    हाँ, ये भी बोलचाल का यूनिकोडित रूप ही है ऐसा मान लेते हैं…

  3. anamdas Says:

    अच्छा मुद्दा छेड़ा है, और खुलकर लिखिए. भाषा हमारी चिंता में बहुत सतही तौर पर है, हमेशा हेडलाइंस में बात होती है, गहराई में जाने की ज़रूरत है.

  4. प्रमोद सिंह Says:

    लाइए, लाइए, खोजकर लाइए कुछ असल ज्ञानदार-शानदार मसाला..

  5. v9y Says:

    प्रतीक्षारत..

  6. Sanjeet Tripathi Says:

    बहुत सटीक मुद्दे पर बात छेड़ी है आपने!!

  7. paramjitbali Says:

    जरूर विचार करना चाहिए।

  8. अनूप शुक्ल Says:

    सही है। आगे पेश किया जाये!

  9. संकर भाषा के जन्म पर सोहर उर्फ़ डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - भाग २ « समकाल Says:

    [...] समकाल a blog on current affairs « संकर भाषा के जन्म पर सोहर उर्फ़ डोंट टच … [...]

  10. चौपटस्वामी Says:

    @ ज्ञान जी : औपनिवेशिक अतीत के कुहासे ने इस समूचे देश को अपनी लपेट में ले रखा है . ऐसे में हम और आप तो सचेत रहने का प्रयास भर कर सकते हैं . ‘कोंहडौरी’ पर लिखने वाले को लपेट सके ऐसा दुस्साहस कौन करेगा .
    ***
    @ रवि भाई : हम तो हमेशा से बहुत कुछ मानते ही आ रहे हैं .
    ***
    @ अनामदास : कोशिश करूंगा कि सतह पर बैठी तितली न बनूं , बल्कि मधुमक्खी की तरह कुछ गहन और सार्थक कर सकूं .
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    @ प्रमोद सिंह : महाराज! मैं तो बिसाइती/मनिहार हूं . अब कुछ काम का या पसंद का है कि नहीं , यह तो सुघड़-सचेत सधवाएं ही बताएंगीं .
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    @ v9y एवं अनूप भाई : दूसरी कड़ी पेश-ए-नज़र है .
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    @ संजीत एवं परमजीत भाई : धन्यवाद!

  11. pratyaksha Says:

    आगे लिखिये

  12. संकर भाषा के जन्म पर सोहर उर्फ़ डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - भाग ३ « समकाल Says:

    [...] डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - भाग ३ भाग १ , भाग [...]

  13. संकर भाषा के जन्म पर सोहर उर्फ़ डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - भाग ४ « समकाल Says:

    [...] डोंट टच माइ गगरिया मोहन रसिया - भाग ४ भाग १ , भाग २ , भाग [...]

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