साथियों के विचारार्थ सुभाषितानि
-१-
दूरस्थोपि न दूरस्थः यो यस्य मनसि स्थितः ।
यो यस्य हृदये नास्ति समीपस्थोपि दूरतः ॥
– चाणक्य
( जो जिसके चित्त में बसता है वह उससे दूर होते हुए भी दूर नहीं रहता — निकट ही जान पड़ता है। इसके विपरीत, जो जिसके चित्त में नहीं रहता वह समीप होते हुए भी दूर ही जान पड़ता है।)
-२-
कुर्वन्नपि व्यलीकानि यः प्रिय: प्रिय एव सः ।
अनेकदोषदुष्टोपि कायः कस्य न वल्लभः ॥
(जो प्रिय है वह कितने भी अपराध करे,तो भी प्रिय ही बना रहता है। अनेक दोषों से दूषित होने पर भी अपना शरीर किसको प्रिय नहीं लगता ।)
-३-
द्वेष्यो न साधुर्भवति मेधावी न पंडितः ।
प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव हि॥
– महाभारत
(जिस व्यक्ति से द्वेष हो जाता है वह न साधु जान पड़ता है,न विद्वान और न बुद्धिमान । जिससे प्रेम होता है उसके सभी कार्य शुभ और शत्रु के सभी कार्य अशुभ प्रतीत होते हैं ।)
-४-
अन्यमुखे दुर्वादः स्वप्रियवदने तदेव परिहासः ।
इतरेन्धजन्मा यो धूमः सोगुरुभवो धूपः ॥
– शुक्र
( जो बात दूसरों के मुख से निंदा या गाली समझी जाती है,वही अपने प्रियजन के मुख से कही जाने पर हंसी-मज़ाक जान पड़ती है।साधारण लकड़ियों का धुआं धुआं ही माना जाता है,लेकिन वही जब अगर की लकड़ी से निकलता है धूप समझा जाता है ।)
और समापन महागुरु कबीर की बात के साथ जो साधु-समाज से बार-बार कहते रहते थे कि ‘बिना प्रीति का मानवा कहीं ठौर ना पावै’ और यह भी कि ‘जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान’ . सो समापन उनके एक दोहे के साथ :
सोना , सज्जन , साधुजन , टूटि जुटैं सौ बार ।
दुर्जन , कुम्भ , कुम्हार का , एकै धका दरार ॥
*********
June 16, 2007 at 8:55 am
वाह, वाह.. स्वामीजी, समकाल का यह सुर बड़ा समकालीन है.. इकॉनामी भी है.. सोने पे सुहागा है..
June 16, 2007 at 8:58 am
जो आपने कहा, उसे सुना, ध्यान दिया, और फिर कबीर दास जी कि एक बात मुझे भी याद आई.
मूरख हृदय न चेत
जो गुरु मिलै विरंचिसम
गांठ बांधने की बात है.
June 16, 2007 at 9:01 am
ज्ञानप्रद सूक्तियाँ!
June 16, 2007 at 9:29 am
अच्छे संचय हैं। इसमें और जोड़ते रहें।
June 16, 2007 at 9:31 am
मेरी ओर से भी कुछ सुभाषितानि
ऊष्ट्राणां च विवाहेषु गीतम् गायंति गर्दभा: परस्परम् प्रशंसन्ति अहो रूपम् अहो ध्वनि
अहं निज: परोविति गणनाम् लघुचेतसाम उदारचरितानाम तु वसुधैव कुटुम्बकम्
June 16, 2007 at 6:39 pm
बड़ी अच्छी पोस्ट है! सुंदर उक्तियां!